अंतिम नवीनीकृत: 29 Jun 2015
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विजन - विद्युत क्षेत्र में वैश्विक शक्ति

डीटीएल एक दृष्टि में

दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) 1 जुलाई 2002 को अस्तित्व में आई । दिल्ली के ऊर्जा क्षेत्र के पुनर्गठन के पश्चात, इसे दिल्ली विद्युत बोर्ड से अलग कर एक पृथक निकाय के रूप में बनाया गया था। सभी प्रयोजनों के लिए इसे दिल्ली की स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटी (एसटीयू) का दर्जा दिया गया। डीटीएल का काम, देश की राजधानी में प्रभावी और विश्वसनीय ट्रांसमिशन नेटवर्क स्थापित और प्रचालित कर विद्युत ट्रांसमिशन के लिए भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 के खंड 39(2) के अनुसरण में एसटीयू के कार्यों का निष्पादन करना है।

राजधानी दिल्ली के स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटी के रूप में डीटीएल केंद्रीय क्षेत्र के विद्युत उत्पादन स्टेशनों और राज्यांतर्गत विद्युत उत्पादन स्टेशनों से विद्युत का पारेषण कर रही है और दिल्ली डिस्कॉम को उपलब्ध करा रही है जो प्रकारांतर में दिल्ली के उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचा रही है।

डीटीएल ने ट्रांसमिशन के क्षेत्र में अद्यतन प्रोद्योगिकियों को अपनाया है जैसे कि गैस इंसुलेटेड सब-स्टेशन (जीआईएस) और 220 केवी और 400 केवी की केबिलों को भूमिगत बिछाया गया है।

डीटीएल के पास 400 केवी के 4 सब-स्टेशन और 220 केवी के 33 सब-स्टेशन हैं। इन सब-स्टेशनों में से 400 केवी का 1 सब-स्टेशन और 220 केवी के 8 सब-स्टेशन जीआईएस प्रौद्योगिकी के उपयोग द्वारा बनाए गए हैं।

दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड ने दिल्ली राज्य के लिए द्वीपिय योजना लागू की है जो कि आकस्मिकताओं के समय दिल्ली ऊर्जा सिस्टम को पृथक करके बचाने तथा मुख्य ग्रिड की विफलता में भी दिल्ली को उसकी आवश्यकतानुसार लोड पर आबाधित आपूर्ति बनाए रखती है।

एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज नेटवर्क के प्रचालन, अनुरक्षण और मॉनीटरिंग के प्रबंधन में डीटीएल की स्तरीय प्रबंधन प्रणाली को देखते हुए इसे आईएसओ 9001: 2008 प्रदान किया गया है।

अंतिम बार अपडेट किया 28-Apr-2017

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